शनिवार, 29 जून 2013

latiphe

हँसगुल्ले है ये, जरा आँखों से खाना.और दिल से खिलखिलाना
क्याकि ये है आपको राना का नज़राना, थोड़ा सा मुस्कुराना ............
1-एक मुर्गी बाज़ार में गयी और कहा- एक अंड़ा देना।
  दुकानदार- अंड़े का तुम क्या करोगी?
  मुर्गी-मेरे पति ने कहा है कि पाँच रुपए के अंड़े के लिए तुम अपना फिगर खराब मत करो।

2-भारतीय पतिनयाँ अपने पति को 'एजी बोल पुकारती हैंं। जानते हो क्यों ?
क्योंकि, भरे बाज़ार में 'अबे गधे कहकर तो, नहीं पुकार सकती है, इसलिए उसका 'शोर्ट फार्म इस्तेमाल   करती है।

3-एक बूढ़ा आदमी जंगल से गुजर रहा था कि अचानक एक शेर आ गया।
शेर को देखते उस बूढ़े से कहा कि- शेर भार्इ, मैं तो बूढ़ा आदमी हूँ,पीछे से एक नौजवान लड़का आ रहा है, तुम उसका शिकार करो,क्योंकि उसका खून गर्म है।
शेर बोला-नहीं, आज तो मेरा दिल कोल्ड डि्रक्स पीने को कर रहा है।।
-राजीव नामदेव 'राना लिधौरी,टीकमगढ़ (मध्यप्रदेश)

गुरुवार, 27 जून 2013

व्यंग्य कविता -'सिखला देंगें-राजीव नामदेव ''राना लिधौरी

व्यंग्य कविता -'सिखला देंगें
इस भयंकर मंहगार्इ से जनता हो रही पस्त ।
नेता जी वटोर रहे घोटालों से धन,दोनो हस्त ।।
अगर पिकनिक का मन हो तो कहीं दौरे पर जाना ।
देकर चुनावी भाषण कुछ झूठे वायदे कर आना ।।
कर रहे गाँव का दौरा साथ में लेकर अपने चमचे ।
इसको भी हम बतला देंगें अब सरकारी खर्चे ।।
जो रहो साथ नेता जी के तो कुछ नुस्खे सिखलाये।
कैसे जनता को उल्लू बनाते है फिर हम बतलाये ।।
तुमको पूरा गिरगिट सा हम बना देंगें ।
चुनाव आने पर कैसे बदलते रंग सिखला देंगें।।
नहीं सीखा हो लड़ार्इ झगड़ा तो हम सिखला देंगें।
नेता बनकर आना संसद में वहाँ पे्रकिटस करवा देंगें।।
            -  राजीव नामदेव ''राना लिधौरी,टीकमगढ़,(म.प्र.)

गुरुवार, 20 जून 2013

हाइकु कविता-उत्तराखंड में आयी आपदा पर दो हाइकु

उत्तराखंड में आयी आपदा पर दो हाइकु कविता

आयी आफत ,
बाढ़ के आंतक से,
जन आहत।।

            चुप्पी तोड़ी तो,
            खूब कहर ढाया।
            नदी ने वहाँ।।

         राजीव नामदेव 'राना लिधौरी
        संपादक 'आकांक्षा पत्रिका
       अध्यक्ष-म.प्र लेखक संघ,टीकमगढ़
      शिवनगर कालौनी,टीकमगढ़(म.प्र.)
        भारत,पिन:472001 मोबाइल-9893520965
       

शनिवार, 15 जून 2013

FATHER'S DAY- RAJEEV NAMDEO "RANALIDHORI"

FATHER'S DAY- RAJEEV NAMDEO "RANALIDHORI"'
हेप्पी फादर्स डे-
हम सभी परमपिता परमेश्वर की संतान है पिता चाहे वे परम पिता परमेश्वर अर्थात भगवान हो या फिर जिसने आपको पैदा किया वह पिता(फादर) हो। हमें दोनो का सम्मान करना चाहिए हमारे लिए दोनों की पूजनीय है। हमें ऐसा काम और इतना नाम कमाना चाहिए कि 'लोग आपके पिता को आपके नाम से जाने तथा याद करे यही एक पिता के लिए एक पुत्र द्वरा दुनिया का सबसे अच्छा व सबसे सुंदर उपहार होता है।
                                                   आधुनिक पिता-पुत्र पर अपनी स्वरचित चार पकिंतयाँ पेश है-
             पिता-जिन्दगी भर पार्इ-पार्इ जोड़कर अपनी संतानों का पालन-पोषण करता है लेकिन,
             बेटा-उस दौलत को अपनी मौजमस्ती में उड़ा देता है।
             पिता-उसे पढ़ा लिखा कर नौकरी और छोकरी के काविल बनाता है।
              बेटा-उसे बुढ़ाने में ओल्ड हाउस छोड़ आता है।।
                       -राजीव नामदेव 'राना लिघौेरी,टीकमगढ़ म.प्र.

शुक्रवार, 14 जून 2013

cow

गाय(कविता)सुरभि यज्ञ आरेछा के उपलक्ष्य में
एक बहुउपयोगी पशु है गाय।
लेकिन, फिर भी,
कितनी है, असहाय।।
जो कसार्इयों द्वारा,
बेरहमी से काट दी जाती है।
चंद पैसों की ख़्ाातिर,
बेच दी जाती है।।
भला क्या, कोर्इ,
अपनी माँ को बेचता है ?
इस तरह काटता है ?
अरे! वो तो सदियों से ही,
हमारी माता के रूप में,
सदा ही पूजी जाती है।
लेकिन,तुम तो
मानव नहीं,दानव हो।
जो यह घ्रणित कृत्य करते हो।
अरे! क्या ?
ऊपर वाले से नहीं डरते हो।
कुछ तो इन पर रहम करो,
थोड़ा सा इनसे भी प्यार करो।।
-राजीव नामदेव 'राना लिधौरी,टीकमगढ़ म.प्र.

गुरुवार, 13 जून 2013

क्रिकेट खिलाड़ी

क्रिकेट खिलाड़ी

करोड़ों लोगों की
भावनाओं से खेलकर,
वे दौलत के लिए
बिकते और खेलते हैं।
इसीलिए तो वे विकेट पर
ज़्यादा देर नहीं टिकते है।
बालर हुए तो क्या हुआ
बड़े बेशर्म है,
खूब दनादन पिटते है।।
-राजीव नामदेव 'राना लिधौरी,टीकमगढ़

क्रिकेट फिकिसंग

क्रिकेट फिकिसंग

जब से दुबर्इ में मैच होने लगे है।
तब से ये फिक्स होने लगे है।
नये खिलाड़ी सटटेबाजों के चंगुल में फंसकर,
अपना खेल,और र्इमान खोने लगे है।
क्यों फिजूल में वक़्त जाया करते हो मिया,
मैच के परिणाम सटटे से होने लगे है।
देश के लिए कौन खेलता है यहाँ,,
चंद पैसों में अब तो ये बिकने लगे है।।
--राजीव नामदेव 'राना लिधोरी,टीकमगढ़ म.प्र.

सोमवार, 10 जून 2013

हायकु प्रार्थना-राजीव नामदेव 'राना लिधौरी

हाइकु कविता-''हायकु प्रार्थना

हे माँ शारदे,
यश,मान,सम्मान।
झोली भर दे।।

    हे माँ शारदे,
    चंचल मन को तू,
    शांत कर दे।।

हे माँ शारदे,
हमें ऐसा वर दे।
बुद्धि भर दे।।

    हे माँ शारदे,
    जो भी हो दु:ख दर्द।
    सब हर दे।।

हे माँ शारदे,
तन मिटे देश पे।
शकित भर दे।।

    हे माँ शारदे,
    र्इश्वर को न भूलूँ।
    मति कर दे।।

हे माँ शारदे,
âदय को निर्मल।
मेरे कर दे।।
        संपादक 'आकांक्षा पत्रिका
           अध्यक्ष-म.प्र लेखक संघ,टीकमगढ़
          नर्इ चर्च के पीछे,शिवनगर कालौनी, टीकमगढ ़(म.प्र.)
        भारत,पिन-472001 मोबाइल-9893520965