शुक्रवार, 29 मई 2015

‘छत्रसाल जयंती’ पर भोपाल में ‘राना लिधौरी’ दी प्रस्तुति-24-5-2015



rajeev namdeo rana lidhoriकार्यक्रम की झलकियाँ
‘छत्रसाल जयंती’ पर भोपाल में ‘राना लिधौरी’ दी प्रस्तुति-
भोपाल म.प्र.के शहीद भवन में दिनांक 24 मई 2015 को ‘अखिल भारतीय बुंदेलखण्ड साहित्य एवं संस्कृति परिषद भोपाल द्वारा  महाराजा ‘छत्रसाल की जयंती’ मनायी गयी। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि वित्तमंत्री श्री जयंत मलैया जी,पंचायत मंत्री श्री गोपाल भार्गव जी,सांसद श्री आलोक संतर, एवं परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री कैलाश मडबैया जी सहित म.प्र. एवं उ.प्र. के लगभग 16 जिलों से आये हुए बुन्देली साहित्यकार उपस्थित रहे। जिसमें विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम के बीच राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी ने भी अपनी प्रस्तुति दी।
                                       
रपट- राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी’
महामंत्री-‘अ.भा.साहित्य एवं संस्कृति परिषद,टीकमगढ़,
मोबाइल-9893520965

शनिवार, 16 मई 2015

गौरया पत्रिका अंक-2 सन् 2015 में राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी’

नगदा म.प्र. से प्रकाशित गौरया पत्रिका अंक-2 सन् 2015

rajeev namdeo rana lidhori में राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी’ की गौरया पर छपी हुई कविता

रविवार, 10 मई 2015

अखिल भारतीय बुंदेलखण्ड साहित्य एवं संस्कृति परिषद् टीकमगढ़ date-10-5-2015

           अखिल भारतीय बुंदेलखण्ड साहित्य एवं संस्कृति परिषद् टीकमगढ़              
    सम्पूर्ण बंुदेलखण्ड प्रदेश को संयुक्त करने वाली प्रतिनिधि पंजीकृत राष्ट्ीय संस्था
         जिला अध्यक्ष-अभिनंदन गोइल,             महामंत्री-राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी’
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‘अ.भा.बुन्देलखण्ड साहित्य एवं सस्ंकृति परिषद ने किया दीनदयाल तिवारी का सम्मान
                    (‘‘डगर बुंदेली-नज़र बुंदेली’ की पढ़ी गई समीक्षा)

टीकमगढ़//नगर की बुंदेली की साहित्यिक संस्था ‘अखिल भारतीय साहित्य एवं संस्कृति परिषद जिला इकाई टीकमगढ़ द्वारा गोइल निवास बाजार जैन मंदिर मार्ग पर,टीकमगढ़ में रविवार 10 मई 2015 को एक कवि गोष्ठी व सम्मान समारोह  आयोजित किया गया कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पूर्व जिला भाजपा अध्यक्ष श्री अशोक कुमार जी गोइल रहे व अध्यक्षता डाॅ.जे.पी रावत ने की जबकि विशिष्ट अतिथि के रूप में आर.एस.शर्मा रहे।
       सर्व प्रथम माँ सरस्वती की बंदना की गई तत्पश्चात परिषद के जिलाध्यक्ष अभिनंदन गोइल ने संस्था के उद्देश्य,कार्य व प्रमुख नियम बताएँ तथा 21 मई 2015 को ‘छत्रसाल जंयती’ मनाए जाने की बात कही। परिषद के महामंत्री राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी’ ने भोपाल में 24 मई को ‘बुन्देली समारोह’ में शामिल होने हेतु आवश्यक जानकारी दी। हाल ही में बुन्देली का कहानी संग्रह ‘बेटा दूद करूला करियो’ के लेखक दीनदयाल तिवारी का सम्मान परिषद के पदाधिकारियो द्वारा किया गया।
                  गोष्ठी में परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष कैलाश मडबैया द्वारा संपादित सद्य प्रकाशित पुस्तक ‘डगर बुंदेली-नज़र बुंदेली’ की समीक्षा पढते हुए राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी’ ने कहा कि-श्री मडबैया जू बुन्देली के विकास के लाने नित नये प्रयोग करत रह है और वे सफल सोई होत  है। उनने निबंधन की पैली पोथी ‘‘बुंदेली के ललित निबंध’’ छपाई फिर ऊ की समीक्षा व यात्रा संस्मरण पे एक औरई नई पोथी ‘‘डगर बुंदेली-नज़र बुंदेली’ कौ प्रकाशन करके भौत नोनों काम करो। दीनदयाल तिवारी ने अपनी समीक्षा में कहा कि-सबरे लेखकन की समीक्षा कौं  पढ़के ऐसौ लगत के जा पोथी प्रेरणादायी और मार्गदर्शक है ई से श्री मडबैया जू खौं हार्दिक बधाई। अध्यक्ष अभिनंदन गोइल ने पनी समीक्षा में जा बात कई कि- जा पोथी बुन्देली पढवे वारन खौ भौत नोनी लगे ई में सबई जनन ने भौत नोनी समीक्षा करी है।
दूसरे सत्र में कवि गोष्ठी हुई जिसमें रामगोपाल रैकवार ने रचना पढ़ी-
जग में कोउ मताई सौ नईयां।सब सुख ऊ की छैइया।
 कँवल मताई साँची ईसर पर लो ऊकी पइया।।
डाॅ. जे.पी.रावत ने कविता सुनायी-चली धना खेतन खों उठके भुंसारे।
 चूनरिया ओढ़ धानी ठुमका सौं मारे।।
गुलाब सिंह यादव भाऊ ने बुंदेली रचना पढ़ी-
ईश्वर की गत अब कौनऊ ने नई जानी।
माटी में मिला दई किसान की कमानी।।
पूरनचन्द्र गुप्ता ने कविता पढ़ी-परनकुटी पै पैरौ दैरय,लक्षमन भइया वृत धारी,
देखत है सब संसारी।।
इनके आलावा अशोक गोइल,विजय कुमार मेहरा, रामगोपाल रैकवार,
आर.एस.शर्मा,एचपी.सिंह ने भी अपने विचार रखे।
अंत में सभी का आभार प्रदर्शन परिषद केे जिलाध्यक्ष अभिनंदन गोइल  ने मiना I                                         
 

रपट- राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी’महामंत्री-‘अ.भा.साहित्य एवं संस्कृति परिषद, टीकमगढ़,मोबाइल-9893520965



शुक्रवार, 8 मई 2015

‘राना लिधौरी’ को मिला ‘दुबई’ जाने का आमंत्रण

            ‘राना लिधौरी’ को मिला ‘दुबई’ जाने का आमंत्रण
टीकमगढ़/    /नगर के ख्यातिप्राप्त साहित्यकार,कवि-शायर एवं म.प्र.लेखक संघ के जिलाध्यक्ष राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी’ को उनके हिन्दी के क्षेत्र में विशेष योगदान के लिए अन्तरराष्ट्रीय साहित्य कला मंच के 30वाँ वार्षिक समारोह 2015 दुबई में शामिल होने के लिए दुवई जाने का न्यौता मिला है। यह समारोह दिनांक में 4 जून से 12 जून 2015 तक दुवई में आयोजित किया जा रहा है। जिसमें दो दिवसीय संगोष्ठी भी आयोजित की गयी है जिसमें ‘विश्व पटल पर हिन्दी’ विषय पर अनेक देशों के विद्वान साहित्यकार अपने विचार आलेख प्रस्तुत करेगे। ‘राना लिधौरी’ भी अपना आलेख प्रस्तुत करेगे।गौरतलब हो कि राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी’ की पुरस्कृत पुस्तक ‘नौनी लगे बुन्देली’ विश्व में बुन्देली का प्रथम हाइकु संग्रह है। ‘अर्चना’,‘रजनीगंधा’ और ‘नौनी लगे बुंदेली’ तीन पुस्तकें छप चुकी है एवं 8 पत्र पत्रिकाओं का संपादन कर चुके है,वर्तमान में आप टीकमगढ़ जिले की एकमात्र साहित्यिक पत्रिका ‘आंकाक्षा’ का सफल संपादन विगत नौ वर्षो से करते आ रहे है तथा साहित्यक संस्था म.प्र.लेखक संघ के टीकमगढ़ के जिलाध्यक्ष के पद पर विगत 13वर्षौ से सुशोेभित है। इस उपलब्धि पर राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी’ को नगर के साहित्यकारों एवं शुभचिंतकों ने बधाईयाँ एवं शुभकामनाएँ दी।                   
                   रपट- राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी’  
  अध्यक्ष म.प्र.लेखक संघ,टीकमगढ़,
मोबाइल-9893520965

सोमवार, 4 मई 2015

बुन्देली कहानी संग्रह ‘बेटा दूध करौला करियो’ का विमोचन हुआ-4-5-2015





rajeev namdeo rana lidhoriबुन्देली कहानी संग्रह ‘बेटा दूध करौला करियो’ का विमोचन हुआ
टीकमगढ़//नगर की साहित्यिक संस्था ‘श्री वीरेन्द्र केशव साहित्य परिषद के बेनर तले’ पं.हरिविष्णु अवस्थी के निवास पर आज दीनदयाल तिवारी‘बेताल’ के बुन्देली कहानी संग्रह ‘बेटा दूध करौला करियौ’ का विमोचन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता आचार्य दुर्गा चरण शुक्ल ने की जबकि मुख्य अतिथि डाॅ.कैलाश विहारी द्विवेदी रहे विशिष्ट अतिथि के रूप में गुण सागर सत्यार्थी जी रहे। पुस्तक की समीक्षा अभिनंदन गोइल ने पढ़ी फिर कवि गोष्ठी भी हुई संचालन अजीत श्रीवास्तव ने किया।
इस अवसर पर प्रमुख रूप से पं.हरिविष्णु अवस्थी,वीरेन्द्र बहादुर खरे, राजीव नामदेव राना लिधौरी, मनमोहन पांडे, डाॅ.डी.पी.खरे,एन.डी.सोनी,रामगोपाल रैकवार,विजय कुमार मेहरा,परमेश्वरीदास तिवारी,हाजी ज़फ़रउल्ला खां जफ़र,पूरनचन्द्र गुप्ता,अवध विहारी श्रीवास्तव,साहित बड़ी संख्या में नगर के साहित्यकार उपस्थित रहे।                                       
 रपट- राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी’
        ,    अध्यक्ष म.प्र.लेखक संघ,टीकमगढ़,
                    मोबाइल-9893520965

रविवार, 3 मई 2015

म.प्र.लेखक संघ की ‘नई कविता’ पर केन्द्रित 197वीं गोष्ठी हुई-3-5-2015




म.प्र.लेखक संघ की ‘नई कविता’ पर केन्द्रित 197वीं गोष्ठी हुई-
 
टीकमगढ़//‘ म.प्र.लेखक संघ जिला इकाई टीकमगढ़ की 197वीं गोष्ठी ‘नई कविता’ पर केन्द्रित गायत्री शक्ति पीठ बानपुर दरवाजा में आयोजित की गयी, जिसके मुख्य अतिथि कवियत्री सुश्री सीमा श्रीवास्तव रहीं व व अध्यक्षता अवध विहारी श्रीवास्तव ‘दाऊ’ ने की जबकि विशिष्ट अतिथि के रूप में बल्देवगढ से पधारे साहित्यकाऱ श्री कोमल चन्द्र बजाज  रहे। सर्वप्रथम सभी ने प्रार्थना गीत - हे प्रभु अपनी कृपा की छाँव में ले लीजिए। कर दृर खोटी बुद्धि सबको नेक नियति दीजिए गया तथा पाँच मिनिट की मौन साधना की। तत्पश्चात-
हरेन्द्र पाल सिंह ने कविता सुनायी- मेरे घर आँगन में गमलों में लगी नागफनी पर जब उग आये थे दो फूल।
संघ के सचिव रामगोपाल रैकवार ने पढ़ा-प्रदर्शन प्रबल हुआ सत्य गया नेपत्थ्य। व्यक्ति पूजा मुख्य है,थोथे सारे कथ्य।।
म.प्र.लेखक संघ के जिलाध्यक्ष राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी’ ने नई कविता सुनायी-
                मेरी ‘आंकाक्षा’ थी कि मेरी कोई आकांक्षा न हो, लेकिन ईश्वर ने दी मुझे एक सुंदर सी आकांक्षा।।
कवियत्री गीतिका वेदिका ने पढ़ा-हे कला के देश हमारी अस्थियाँ लौह के विशाल भाले से ढाँप देना कहीं वबंडर न मचा दे। सियाराम अहिरवार ने कविता सुनायी-जिस पहनावा को लोग जंगली मानकर अनदेखा कर दिया करते थे।
                               आज उसी फैशन को लोग फैशन के रूप में अपनाने लगे है।।
सीताराम राय ने पढा-तेरे ही कर्मो का फल औलाद ने चकाया। कुदरत ने ऐसा कहर बरपाया नादान समझना पाया।
उमाशंकर मिश्र तन्हा’ ने कविता सुनायी- ये दुनिया है घड़ी जिसमें,तीन सुईयो की तरह तीन तरह के हैं आदमी।
हाजी ज़फ़र उल्ला खां ‘ज़फ़र’ ने पढा-भूपंक के झटकों से कहर देख रहा हँू। बरवादियों से उजड़ा चमन देख रहा हूँ
ग्राम लखौरा से पधारे कवि गुलाब सिंह यादव ‘भाऊ’ ने पढ़ा- ईश्वर की गत अब जा काउने न जानी,
                                                 माटी में मिला दई किसान की किसानी।
चाँद मोहम्मद आखिर ने पढा-हिन्दू में बुराई हैे न मुस्लिम में बुराई है,नेता ने खोदी बीच में दोनों के खाई है।।
भान सिंह श्रीवास्तव ने कविता पढी-आइना देखकर खुद वा खुद शरमाई है जन्नत से हूर जमीं पर उतर आई है।।
दीनदयाल तिवारी ने पढा-खक्ष से सदा दूर ही रइऔ बैर सोउ जिन करियो।
आर.एस. शर्मा ने पढा-नए युग के नवाचार शिक्षा का नवाचार।
शांति कुमार जैन ने पढा -अतीत कभी नष्ट नहीं होता,अतीत ही नवजीवन का सुजन करता है।
पूरनचन्द्र गुप्ता ने पढा -आती जाती हे सरकारें बनी सरकार नई है ये, साफ सफाई गंगापावन इनकी नीति नई है ये।
भारत विजय बगेरिया ने पढा -मेरी जिन्दगी कुछ इस तरह गुजर गई जैसे सुबह ही धूप दिन में पसर गई।।
हाजी अनवर ने ग़ज़ल पढ़ी-हुस्न को न छुपा अपने रूख के आँचल में,हुस्न खुद वो हीरा है जो रात दिन चमकता है।।
शकीन खान ने ग़ज़ल पढ़ी-    माँ किसी की दब गई बेटा किसी का खो गया।
कुछ ही पल में देखते ही देखते क्या हो गया।।
 महेन्द्र यादव ने कविता पढी- कुछ तो शर्म करो। इनके अलावा कोमलचन्द्र बजाज बल्देवगढ़, अवध विहारी श्रीवास्तव,डाॅ.एम.पी. गुप्ता,सुरेश नारायण श्रीवास्तव,वेद प्रताप पस्तोर,महेन्द्र यादव,गिरजा शंकर यादव,रमीश खरे,साकेत राज पस्तोर ने भी अपने विचार रखे। गोष्ठी संचालन उमा शंकर मिश्र ने किया एवं सभी का आभार प्रदर्शन सचिव रामगोपाल रैकवार’ ने किया।    
    रपट- राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी’
    अध्यक्ष म.प्र.लेखक संघ,टीकमगढ़,
मोबाइल-9893520965,           

शनिवार, 2 मई 2015

आलेख-''बुन्देलखण्ड़ की प्रमुख पत्रिकायें (आलेख-राजीव नामदेव 'राना लिधौरी)

आलेख-''बुन्देलखण्ड़ की प्रमुख पत्रिकायें
                (आलेख-राजीव नामदेव 'राना लिधौरी)
           
            बुन्देलखण्ड कवियन और साहित्यकारन की खान हती और अबै है। सो इतै से मुलकन पत्रिकाएँ निकरत हतीं और अबै  निकर रइर्ं । बैसै सबसैं पैलाँ सन 1932 में 'वीर बुन्देल पत्रिका निकरी ती फिर दूसरी हमाये टीकमगढ़ सें श्री वीरेन्द्र केशव साहित्य परिषद द्वारा 1 अक्टूबर सन 1940 सें 'मधुकर (पाक्षिक पत्र) नाव से निकरत हती जी के संपादक देश के जानेमाने लेखक पत्रकार दादा श्री बनारसीदास चतुर्वेदी जी हते। 'मधुकर में 'बुन्देली उर खड़ी बोली में कविताएँ व आलेख छपत हते। जून सन 1944 सें 'लोकवार्ता त्रैमासिक टीकमगढ़ से कड़न लगी जी को सम्पादन श्री कृष्णानंद गुप्त जू करत ते।'विन्ध्यवाणी साप्ताहिक टीकमगढ़ से 2 अक्टूबर सन 1948 से छपन लगो, सन 1962र्इ. में श्री कन्हैया लाला जू 'कलश ने गुरसराय से 'बुन्देली वार्ता शुरू  करो, फिर  डा. हरि सिंह गौर विश्व विधालय सागर से सन 1983-84 से 'र्इसुरी नाव से पत्रिका कौ प्रकाशन भऔ, जी के संपादक डा. कांति कुमार जैन हते र्इ में बुन्देलखण्ड के साहित्यकारन कौ एनर्इ स्थान मिलत हतो र्इ मे 'बुन्देली शब्द कोश कौ प्रकाशन भी होत हतो जो कि भौतर्इ काम कौ हतो।
        संवत 2038 से छतरपुर से 'मामुलिया पत्रिका डा. नर्मदा प्रसाद जी गुप्त के कुशल सपांदन में निकरत हती। छतरपुर से ही बसारी बुन्देली मेला उत्सव पर  'बुंदेली बसंत नाव से एक वार्षिक पत्रिका(स्मारिका) सन 2000 से निकरन लगी जी कै संपादक डा. बहादुर सिंह जी परमार है, जा पत्रिका एक शोध ग्रंथ को काम करत है। र्इ में 150 पेजन में बुन्देली से सम्बधित सबर्इ तरहा की जानकारी छपत है।
        एर्इ तरहा की एक वार्षिक पत्रिका 'बुन्देली दरसन हटा जिला दमोह से सोउ  सन  2008 से निकरन लगी है। जी को संपादन डा. एम.एम.पाण्डे जू करत, जा पत्रिका नगर पालिका हटा के द्वारा बुन्देली मेला पै हर साल निकरत। र्इ कौ चौथौ अंक भी अबर्इ कछु दिनन में निकरबै वारौ है। र्इ में सोउ मुलक पन्ना रत । तीसरे अंक सन 2010 में 124 पेज हते, रंगीन झाँकियन ओर फोटयन सैं सजी धजी जा पत्रिका भी मन खौ एनर्इ नौनी लगत । दमोह से 'बुंदेली अर्चन सोउ सन 2010 सें  निकरवौ शुरू भर्इ । ग्वालियर सै 'आखर माटी नाव सै सोउ एक पत्रिका निकरत ।            
    टीकमगढ़ (म.प्र.) से 'आकांक्षा नाँव से भी सन 2006 से एक वार्षिक लघु पत्रिका 64 पेजन की राजीव नामदेव 'राना लिधौरी के संपादन में निकरत है, र्इ में सोउ बुन्देली की कविताएँ छपती है। जी कौ सन 2015 कौ अंक 10 'माँ, विशेषांक के रूप में छपो  है जोउ अपुने हातन में है। सन 2006 से एक औरर्इ लघु चौमासा पत्रिका 48 पेजन की उरर्इ जिला जालौन (उ.प्र.) से 'स्पंदन नाव से निकरन लगी हैं। जी कै संपादक डा. कुमारेन्द्र सिंह जी सेंगर हैं।
            सन 2010 में छतरपुर से एक 'अथार्इ की बातें नाव से शुद्ध बुन्देली में एक त्रैमासिक पत्रिका श्री सुरेन्द शर्मा 'शिरीष जी के सपांदन के शुरू भइ है, जी कौ दूसरौ अंक छप गऔ है।साप्ताहिक निर्दलीय समाचार पत्र (भोपाल),चौमासा आदि।
 र्इ तरा से बुंदेली खौ बढावौ देवै वारी मुलकन पत्रिकाएँ निकरन लगी हैं। जी से बुन्देली कौ खूबर्इ नाव देश भर में हो रऔ है। इन पत्र-पत्रिकाओं में बुन्देलखण्ड की लोक संस्कृति एवं लोक साहित्य आदि की विशेषताओं को देश भर में एनर्इ बिखेरों है जा से बुन्देली को मान बढ़ो उर हमार्इ बुन्देली आज सबर्इ खौं नौनी लगन लगी है।
            मुलकन फिलमें सोउ बुन्देली में बनन लगी और बुन्देली लोकगीत तो देश भरे में सुने जात है। 'पीपली लाइव फिलम कांै गाना (लोकगीत) 'मंहगार्इ डायन खाय जात है तो एनर्इ पिरसिद्ध भओ। र्इ गाना (लोकगीत) ने तौ पूरे देशभरे में धूम मचा दयी। अब 'बुन्देली को भविष्य भौत ऊजरौ दिखार्इ देन लगो है।            
        &बुन्देलखण्ड़ की प्रमुख पत्रिकायें आलेख-राजीव नामदेव 'राना लिधौरी
राजीव नामदेव 'राना लिधौरी
        संपादक 'आकांक्षा पत्रिका
       अध्यक्ष-म.प्र लेखक संघ,टीकमगढ़
      शिवनगर कालौनी,टीकमगढ़(म.प्र.)मोबाइल-9893520965
       साभार-'आकांक्षा पत्रिका टीकमगढ़ अंक-7 (2011) सपांदक-राजीव नामदेव'राना लिधौरी

व्यंग्य- ‘‘ लक्ष्मी जी का इंटरव्यू ’’-व्यंग्य-राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी’

व्यंग्य- ‘‘ लक्ष्मी जी का इंटरव्यू ’’



                    (व्यंग्य-राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी’)

               
                लक्ष्मी जी को आज, कलयुग में इस धरती लोक में सबसे ज्यादा पूजा जाता है।  मेरा मानना है कि उनके पतिदेव विष्णु जी भी स्वर्ग लोक में उनका उतना नाम नहीं लेते होगें, जितना हम पृथ्वीवासी यहाँ पर उनका नाम,ध्यान एवं पूजा करते है उनका महत्व हर पल महंगाई की तरह बढ़ता ही जा रहा है। लक्ष्मी जी आज सभी के लिए बहुत महत्वपूर्ण एवं बहुत उपयोगी हो गयी है। गरीब हो या अमीर सभी लक्ष्मी जी के पीछे हाथ धोकर पडे हैं।कुछ उनसे आगे भी निकल गये है।। मै भी लेखक एवं पत्रकार होने के नाते उनके पीछे पड़ गया और उनका इंटरव्यू लेने के लिए बडी मुश्किल से उन्हें तैयार किया लक्ष्मी जी ने समयाभाव के कारण बहुत ही कम समय में संक्षिप्त में इंटरव्यू के माध्यम से जो बातें की वह इस प्रकार है-
मैंने पहला प्रश्न पूछा-  हे देवी लक्ष्मी जी, आपने अपना वाहन ‘उल्लू’ को ही क्यों चुना ?
लक्ष्मी जी ने उत्तर दिया- क्योंकि सभी लोग मेरे पीछे पडे़ रहते हैं, उन्हें उल्लू की तरह सत्य एवं धर्म ,सही और गलत कुछ भी दिखाई नहीं देता है और वे लोग दूसरों को  उल्लू बनाते रहते है और मैं उनको उल्लू बनाती रहती हँू। उल्लू हम दोनों के बीच काॅमन हेाता है इसलिए हमने अपना वाहन उल्लू को ही चुना।
मैंने दूसरा प्रश्न पूछा-        हे देवी जी, आप गरीबों के पास क्यों नहीं रहती ?
लक्ष्मी जी ने उत्तर दिया-     क्योंकि गरीब लोग हमेशा मेरा रोना ही रोते रहते है, कहते है कि मेरे पास कुछ नहीं है काम धन्धा कुछ करते नहीं और मुफ़्त में मुझे पाने के ख्वाब देखते रहते है यदि मैं कहीं से प्राप्त भी हो जाऊँ तो उसे शराब और जुआ आदि में नष्ट कर देते हंै। वे मुझे अपने पास स्वयं नहीं रखते
मैंने तीसरा प्रश्न पूछा-    आप अमीरों के पास ही क्यों अधिक रहना पंसद करती हो ?
लक्ष्मी जी ने उत्तर दिया-     क्योंकि अमीर लोग रोज उठते से ही नियम से मेरी पूजा-अर्चना करते     है मुझे सदा शुद्ध घी एवं मावा की बढि़या मिठाईयाँ खिलाते रहते हैं मेरी हिफाजत करते है, मेरी चिंता में चिंता ग्रस्त रहते हैं मेरी नाम की माला चैबीस घण्टे जपते रहते है और यहाँ तक कि मेरी चिंता में खुद ही रोगग्रस्त हो जाते है, लेकिन मुझे फिर भी नहीं भूलते यहाँ तक कि मेरी ख़ातिर वे अपने माँ-बाप एवं रिस्तेदारों आदि तक को भूल जाते हैंैं। वे मुझे अपनी जान से भी ज्यादा चाहते हैं मेरे लिए अपनी जान तक दे देते है रहने की बेहतरीन व्यवस्था करते हैं। इतना त्याग गरीब कभी नहीं कर सकता।
मैंने अगला प्रश्न पूछा-    सुना है आप बहुत चंचल हा,े एक स्थान पर ज्यादा टिकती नहीं हो ?
लक्ष्मी जी ने उत्तर दिया-     हाॅ, वो क्या है कि कभी-कभी कुछ अमीरों को मेरी वजह से कुछ ज्यादा     ही घमंड हो जाता है और वे मद में चूर होकर मुझे तक भूल जाते है ऐसे     में मुझे उनकी सही औकात दिखाने के लिए वहाँ से किसी चोरी,डकैतीया छापा पड़वाकर या किसी अन्य माध्यम से दूसरी जगह जाना पड़ता है।
मैंने अगला प्रश्न पूछा-    ऐसा माना जाता है कि हम इंसानों में विशेष प्रजाति ‘नेता’ एवं ‘पुलिस’ पर आपकी बहुत कृपा दृिष्ट रहती है ?
लक्ष्मी जी ने उत्तर दिया-     हाॅ, यह बात सही है नेता मेरा प्रिय शिष्य है क्यांेकि वो मुझे देश के                     विभिन्न स्थानों के साथ-साथ विदेश भ्रमण पर ले जाता है मेरा मन एक                     स्थान,एक देश में रह कर ऊब जाता है। इसीलिए नेता मुझे विदेश भ्रमण                         कराता है।
मैंने अगला प्रश्न पूछा-    आपको कौन सा देश भ्रमण करने में सबसे ज्यादा मज़ा आता है ?   
लक्ष्मी जी ने उत्तर दिया-     मुझे भारत में मुंबई,दिल्ली एवं विदेशों में स्विट्जरलंैंड बहुत पंसद है।
मैंने अगला प्रश्न पूछा-    आप कहाँ रहना अधिक पसंद करती हैं आपका पसंददीदा स्थान ?   
लक्ष्मी जी ने उत्तर दिया-     मुझे स्विट्जरलंैंड में स्विस बैंकों में ‘यू बी एस’ बैंक बहुत ज्यादा प्रिय है मैं
अधिकांश समय वहीं पर रहती हूँ। यदि मैं मर भी गयी तो इसी जगह पर मरना पसंद करूंगी। वहाँ का एकांत मुझे बहुत पसंद है कोई डिस्टर्वेंस नहीं करता।
मैंने अगला प्रश्न पूछा-    आपका स्थायी पता क्या है ?   
लक्ष्मी जी ने उत्तर दिया-     वैसे मेंै रहती तो विष्णु जी के साथ ही हँू ,लेकिन उन्हें मेरे साथ रहने का वक्त ही नहीं मिलता, इसलिए मैंने अपना एक नया फ्लैट स्विट्जरलंैंड में स्विस बैंकों में ‘यू बी एस’ बैंक खरीद लिया है वही पर रहती हँू।
मैंने अगला प्रश्न पूछा-    और पुलिस पर भी तो आप मेहरवान होती है कोई खास वजह ?   
लक्ष्मी जी ने उत्तर दिया-     भई ऐसा है कि पुलिस मेरे प्रिय शिष्य नेता की भी शिष्य होती हैं इसलिए                     उसका भी थोड़ा बहुत ध्यान रहना पड़ता है।
मैंने अगला प्रश्न पूछा-    आपको प्रसन्न करने के क्या उपाय हैं, बतायें ?   
लक्ष्मी जी ने उत्तर दिया-     यह उपाय तो आप मेरे शिष्यों से ही सीख सकते है, आप नेता, पुलिस, चोर, उद्योगपतियों आदि से ट्रेनिंग भी ले सकते हो।
मैंने अगला प्रश्न पूछा-    दीपावली पर आपकी विशेष पूजा अर्चना की जाती है लेकिन फिर भी आप हम                 लोगों से प्रसन्न क्यों नहीं होती ?
लक्ष्मी जी ने उत्तर दिया-     मैं तो सभी के पास आना चाहती हँू लेकिन क्या करूं मजबूर हँू एक तो मेरा वाहन उल्लू को दिन में दिखाई नहीं देता है और दूसरा मैं दीपावली पर आना चाहँू तो आपके पटाखों और बमों की आवाज सुनकर     मेरा उल्लू दूर से ही लौट जाता है।
मैंने एक अंंितम प्रश्न पूछा-    आपकी हमशक्ल को आपसे ज्यादा प्रसिद्धी क्यों मिल रही है ?
लक्ष्मी जी ने उत्तर दिया-     ऐसा है कि वो मेरी जुड़वा बहन हैं मैं पहले हुई थीं वह एक मिनिट बाद                     इसलिए उसका नाम ‘दो नंबर की लक्ष्मी’ हैं और छोटे को तो हमेशा ही   ज्यादा प्यार मिलता है। इसलिए वह छोटी होने का फायदा उठा रही है।
मैंने लक्ष्मी जी को इंटरव्यू लेने के लिए समय देने के पर बहुत-बहुत धन्यवाद दिया और अब मैं आपको उल्लू बनाने के लिए यह व्यंग्य लिख रहा हँू।

    888    / राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी’
        संपादक ‘आकांक्षा’ पत्रिका
       अध्यक्ष-म.प्र लेखक संघ,टीकमगढ़
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