रविवार, 25 दिसंबर 2016

‘राना लिधौरी’ हुए ‘मंजर एवार्ड’ से सम्मानित

date 25-12-2016
‘तज़ीम बज्में अदब’ को मुशायरा सम्पन्न-
‘राना लिधौरी’ हुए ‘मंजर एवार्ड’ से सम्मानित
 
टीकमगढ़// इंदिरा कालोनी में शेख आजाद केप्टन के निवास पर तंजीम बज्में अदब का सालाना जलसा एवं मुशायरा हुआ जिसकी सदारत झांसी से तशरीफ लाये शायर जबनाब सिराज तनवीर ने की तथा मेह




rajeev namdeo rana lidhoriमाने खूसूसी शायर कारी अखलाक साहब ने की एवं मुशायरे की नजामत झाँसी के शायर सराफराज ‘मासूम’ ने की, विशिष्ट अतिथि के रूप में मातादीन वंसल, मुमताज अली व रमाजान खां कल्लू उपस्थित रहे।
 इस मौके पर राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी’,अनवार खान सहिल, एवं बशीर फराज को ‘मंजर एवार्ड से सम्मनित किया गया। इस मौके पर फरीद बेग (बिजावर) नीरव (बिजावर),नसीम मुंहफट झाँसी, इकवाल फजा, हाजी जफरउल्ला खां ‘जफर’, राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी’, अनवर खान, साहिल, बशीर फराज, जाबिर गुल, चाँद मोहम्मद आखिर, साबिरा सिद्दकी, शेख सत्तार आजाद केप्टन, गुलाब िंसह भाऊ, पूरनचन्द्र गुप्ता,सियाराम अरिवार,आदि ने अपने कलाम पढे़ सभी का शुक्रिया अदा सदर इंकवाल फजा ने किया।


रपट- राजीव नामदेव ‘‘राना लिधौरी’’
                                    जिलाध्यक्ष टीकमगढ़
,   

बुधवार, 21 दिसंबर 2016

‘ थिंक बिथ मी’ पुस्तक का विमोचन हुआ DATE- 18-12-2016








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‘ थिंक बिथ मी’ पुस्तक का विमोचन हुआ

टीकमगढ़// ‘‘हमे अपने कार्य क्षेत्र में सदैव सक्रिय रहना चाहिए’’ यह उद्गार ‘‘म.प्र.लेखक संघ’ के जिलाध्यक्ष एवं प्रसिद्ध साहित्यकार राजीव नामदेव ‘‘राना लिधौरी’’ ने कार्यक्रम में श्री मुख्य अतिथि के रूप में व्यक्त किये।
सहारा आफिस में हुए विमोचन समारोह में मुख्य अतिथि राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी रहे जबकि कार्यक्रम की अध्यक्षता सेक्टर प्रमुख परवेज खान ने की।
इस अवसर पर सहारा श्री सुव्रतो राय की पुस्तक ‘‘थिंक बिथ मी’ का विमोचन किया गया। श्री राना लिधौरी ने कहा कि सहारा श्री कि यह पुस्तक बहुत उपयोगी,व पठनीय है जो अपकी सोच को बदल कर रख देगी।
सेक्टर प्रमुख परवेज खान साहब ने कहा की सभी को यह पुस्तक पढ़नी चाहिए इससे बहुत कुछ सीखने को मिलेगा। गौरतलब हो कि सहारा श्री की ‘थिंक विथ मी’ पुस्तक हिन्दी व अंग्रेजी दोनों भाषाओं में प्रकाशित की गयी है। इसके पूर्व उनकी बहुचर्चित पुस्तक ‘‘मत्रांस’ सर्वाधिक बिक्री कर ‘वेस्ट सेलर आवार्ड’ से सम्मानित हो चुकी है।
इस अवसर पर अनिल िंसह, अरूण भामड़ी, प्रदीप जैन,संतोष अग्रवाल, जलील खान, लक्ष्मण हरदासानी, घनश्याम हरदासानी, मुनीर खान, अनुराग त्रिपाठी, जय प्रकाश सक्सेना, अरूण खरे, मनीष चौरसिया,हरीष तिवारी,अजय यादव, इरफान खान आदि उपस्थति रहे।
कार्यक्रम का संचालन प्रदीप खरे ने किया एवं सभी का आभार प्रदर्शन अनिल सिंह ने किया।

रपट- राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी
जिलाध्यक्ष म.प्र. लेखक संघ,
टीकमगढ़
मोबाइल-9893520965

,


रविवार, 4 दिसंबर 2016

‘बुन्देली’ पर हुई कवि गोष्ठी date-4-12-2016












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‘बुन्देली’ पर हुई कवि गोष्ठी   date-4-12-2016
टीकमगढ़/यूनीक एयूकेशलन अकेडमी स्कूल चकरा,सिद्धखान रोड, में म.प्र.लेखक संघ’ जिला इकाई टीकमगढ़ की 218 वीं गोष्ठी ‘बन्देली’ पर हुई जिसके मुख्य अतिथि आचार्य पं.दुर्गाचरण शुक्ल रहे व
अध्यक्षता प.हरिविष्णु अवस्थी ने की
जबकि विशिष्ट अतिथि के रूप में कुण्डेश्वर से पधारे
प.गुणसागर सत्यार्थी एवं डॉ. दुर्गेश दीक्षित रहे।
श्री गणेश एवं सरस्वती वंदना के पश्चात
ग्राम नदनवारा से पधारे कवि शोभराम दांगी ने कविता पढ़ी-
बडे हरे भरे पेडन सें देखों कैसों दोरो, जम रव।
जीके दोरे पेड़ो नइयाँ उकौं कैसों लगरव।।
बल्देवगढ़ से पधारे कवि कोमलचन्द्र बजाज ने पढ़ा-
मान त्याग दे तू जीवन में मिल जाये,अविनाशी है।
ग्राम लखौरा से पधारे कवि गुलाब सिंह यादव ‘भाऊ’ ने पढ़ा-
‘अब नये लरका बिगरत जा रय,अपने मन कौ चा रये।
ग्राम पठा से आये कवि सीताराम राय ने पढा-
‘‘होत भुन्सरा गुफना लेके चल दईदारे रे।
हँसमुख गोलमटोल है मुईया उगर की वारी रे।
सीमा श्रीवास्तव ने पढ़ा-
हमने कइ धन्ना सेठ सो बाबूलाल चौक गये।
काय के आदे बार दय,आदे जमडार में डार दय।
गणेश पन्ना लाल शुक्ला ने अपनी प्रसिद्ध बुन्देली कविता
‘‘जे है बुन्देली पाव’’ सुनायी।
म.प्र. लेखक संघ के अध्यक्ष राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी’ ने
बुन्देली कुण्डलियाँ सुनाई-
दारू में गुन भौत है दारू करती ढैर,
दारू से कई इक मिटे पार लगे न फेर।।
कह ‘राना’कविराय दारू है चाल बिकारू।
जो अपनों हित चहे
कभऊँ न पीवे दारू।।
सियराम अहिरवार ने रचना पढ़ी-
जनवा हैं पर जानत नईया,बात काउ की मानत नईया।
बिन सींगन के नटवा हो गये, अपने वे पहचानत नईयाँ।।
हाजी ज्फरउल्ला खां ‘जफ़र’ ने ग़ज़ल पढ़ी-
सुन कें हँस रय काय जफर तुम अपनी बीती सबे सुनाई।।
कृष्णकिशोर रावत ने कविता सुनायी-
परिंदो ने बना लिये नये घर,जंगलों से आ गये है शहर।।
डी.पी.शुक्ला ने कविता सुनायी-
ई देश के लाने सवई जौ कर दओ,
पास पडौस एक कोने में धर दओ।
पूरन चन्द्र गुप्ता ने कविता पढ़ी-
परनकुटी पै पैरों देरय,लक्ष्मण भइया बलधारी।
देखत है सब नरनारी।।
आर.एस.शर्मा ने कविता पढ़ी-
नोट भी बदल रहा, सोच भी बदल रही मेरा देश भी बदल रहा।
बी.एल.जैन ने कविता पढ़ी-
भाई मैंने देखा एक खोटा सिक्का आंतकवाद पर अधारित।

इनके अलावा डॉ.डी.पी.,खरे, वीरेन्द्र चंसौरिया, रामगोपाल रैकवार ,विजय मेहरा, आर.एस.शर्मा, परमेश्वरीदास तिवारी,मुन्ना मिश्रा,डी.पी.यादव, दयालीराम विश्वकर्मा, संजय त्रिपाठी,एस.अहलावत,आदि ने भी अपने विचार रखे।
गोष्ठी संचालन राजीव नामदेव राना लिधौरी’ ने किया
एवं सभी का आभार प्रदर्शन डॉ.महेन्द्र विश्वकर्मा ने किया।

रपट- राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी’,
अध्यक्ष म.प्र.लेखक संघ,टीकमगढ़,
मोबाइल-9893520965,

सोमवार, 7 नवंबर 2016

‘बाल साहित्य’ पर हुई कवि गोष्ठी 6-11-2016

date- 6-11-2016
‘बाल साहित्य’ पर हुई कवि गोष्ठी




bal sahitaya
(दुर्ग,बल्देवगढ़,कुण्डेश्वर, पठा, लखौरा,सिंमरा,तखा से आये कवि)
 
टीकमगढ़//‘ साईं मंदिर के पास गीतकार वीरेन्द्र चंसौरिया के निवास पर
 म.प्र.लेखक संघ’ जिला इकाई टीकमगढ़ की ़ की 217 वीं गोष्ठी ‘बाल साहित्य’ पर हुई
जिसके मुख्य अतिथि बल्देवगढ से पधारे साहित्यकार यदुकुल नंदन खरे रहे
व अध्यक्षता बुन्देली कवि प्रभु दयाल श्रीवास्तव अहिरवार ने की
जबकि विशिष्ट अतिथि के रूप में बुन्देली गीतकार सीताराम राय रहे।
सर्वप्रथम सीताराम राय ने सरस्वती वंदना‘ पढ़ी-
‘‘शारदे कण्ठ विराजो आन,शब्द सार्थक कर दो हे माँ और बढ़ा दो शान।
ग्राम सिमरा से पधारे बाल कवि रविन्द्र यादव ने पढ़ा-
कब तक छुपोगे आखिर सपनों की छाँव में,
                            सामना तो होगा ही, हकीकत की धूप से।।
बाल कवि अमित चौबे ने कविता सुनायी-ब्याब नई करने हतो कर गये,न हक मेंं आफत में पर गये।
दुर्ग छत्तीसगढ से पधारे कवि सुशील यादव ने पढ़ा-
ऐसी तितली वैसी तितली,जाने कैसी कैसी तितली।
 बात बात पर गुस्सा हो जाती,मैंने देखी एक अनमनी तितली।।
म.प्र. लेखक संघ के अध्यक्ष राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी’ ने बाल कविता पढ़ी-
सोचो कितनी प्यारी होती लम्बीं पूँछ हमारी होती।
किसी किसी की पतली होती और किसी की झबरी होती।
बल्देवगढ़ से पधारे कवि युदुकल नंदन खरे ने कविता पढ़ी-
बडे सबेर उठना सीखो,धरती पर तुम चलना सीखो।
बल्देवगढ़ से पधारे कवि कोमलचन्द्र बजाज ने पढ़ा-
राग द्वेष को छोड़ बाबरे ,प्रभु को तू हृदय धर ले।।
ग्राम लखौरा से पधारे कवि गुलाब सिंह यादव ‘भाऊ’ ने पढ़ा-
 ‘अब नये लरका बिगरत जा रय,अपने मन कौ चा रये।
ग्राम पठ से पधारे सीताराम राय ने सुनाया-
शरद पूनम थी चाँद सुहाना था, नंद के अंगना में उत्सव पुराना था।।
    वीरेन्द्र चंसौरिया ने गीत सुनाया-    घर और मन को मंदिर बनाओ।
परमेश्वरीदास तिवारी ने कविता सुनायी-
कहाँ से आया किसलिए आया और कहाँ है जाना।
                        मकसद क्या हे इस जीवन का मानव बनकर आना।।
सियराम अहिरवार ने रचना पढ़ी- मैं बन जाऊँ चन्द खिलौना जग जग कर दूँ कोना कोना।
                     किरणों की सीढ़ी से आकर,धरती पर मैं करूँ बिछौना।।
बुन्देली कवि प्रभुदयाल श्रीवास्तव ने पढ़ा-
बिरजे बलदाऊ के भैया, छुटकी देख जुदैया।
                        हमें खेलबे चंदा चाने अबइ मँगा दो भैया।।
कवि दीनदयाल तिवारी ने पढ़ा-
बच्चे मन के सच्चे, उनमें होता न कोई बिकार।
वे तो एसी कच्ची मिट्टी जिन्हें बल देता कुम्हार।।
पूरन चन्द्र गुप्ता ने कविता पढ़ी-बेटी पढ़े बढ़े बेटी जब, देश प्रगति की चाबी।
                    हे बालक भविष्य की चाबी बिमल भारती चाबी।।
अनवर खान ‘साहिल’ ने ग़ज़ल पढ़ी-
साये मे ंजिसको खेलकर इतने बडे़ हुए,हमसे वो पेड़ नीम का काटा नहीं गया।।
इनके अलावा रामगोपाल रैॅकवार ,विजय मेहरा, आर.एस.शर्मा, बाबूलाल जैन, पी.एल.कड़ा,लाल जी सहाय श्रीवास्तव आदि ने भी रचनाएँ पढी। गोष्ठी संचालन वीरेन्द्र चंसौरिया’ ने किया
 एवं सभी का आभार प्रदर्शन रामगोपाल रैकवार ने किया।

रपट- राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी’,
     अध्यक्ष म.प्र.लेखक संघ,टीकमगढ़,
मोबाइल-9893520965,   

‘आचार्य शुक्ल जी का हुआ जिला पुस्तकालय में सम्मान

Date-6-11-2016
‘आचार्य शुक्ल जी का हुआ जिला पुस्तकालय में सम्मान
टीकमगढ़//‘ शासकीय जिला पुस्तकालय में संस्कृत के विद्वान आचार्य पं. दुर्गाचरण शुक्ल जी के जन्मदिन की 87वीं वर्षगाँठ पर ‘‘शुक्ल जी का सम्मान समारोह’’ जिला पुस्तकालय एवं श्री वीरेन्द्र केशव साहित्य परिषद के सयुंक्त तत्वधान में आयोजित किया गया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. कैलाश बिहारी द्विवेदी ने की तथा
मुख्य अतिथि के रूप में हाजी जफ़रउल्ला खां ‘ज़फ़र’ उपस्थित रहे।
इस अवसर पर श्री वीरन्द्र केशव साहित्य परिषद,
जिला पुस्तकालय,
भारत विकास परिषद,
गुणासागर सत्यार्थी द्वारा आचार्य शुक्ल जी को शाल श्रीफल,स्मृति चिह्न एवं सम्मान पत्र द्वारा सम्मानित किया गया।
अपने स्वागत भाषण में लइब्रेरियन विजय मेहरा ने कहा कि आचार्य जी को इतना बड़ा सम्मान मिलने पर हम सभी साहित्यकार गौरवान्वित हुए है। पं. हरिविष्णु अवस्थी ने बताया कि आचार्य शुक्ल जी को हाल ही में इंदौर में उनकी कृति ‘महर्षि अगस्य दृष्ट ऋग्वेद मंत्र भाष्य’ कृति पर भारत का धार्मिक क्षेत्र में सबसे बड़ा एवं प्रतिष्ठित 51 हजार रूपए का सम्मान ‘‘स्वामी विष्णु तीर्थ सम्मान 2016 से सम्मानित किया गया है।
वहीं साहित्यकार गुणसागर सत्यार्थी जी ने आचार्य जी को बुन्देली एवं संस्कृत का महान विद्वान मानते हुए कहा है कि उन्हें यह सम्मान मिला ये हम टीकमगढ़ वालों के लिए बहुत ही गौरव की बात है।
व्यंग्यकार रामस्वरूप दीक्षित ने शुक्ल जी की कृति ‘महर्षि अगस्य दृष्ट ऋग्वेद मंत्र भाष्य’ को बहुत ही साहित्य की अमूल्य धरोहर माना है।
एडवोकेट अजीत श्रीवास्तव ने आचार्य जी के कृति ‘व्यत्पित्त कोष को’ साहित्य की बुन्देली साहित्य की अनुपम देन माना है। एन.डी.सोनी, डॉ.कैलाश बिहारी द्विवेदी, जफ़रउल्ला खां ‘जफर’, प्रभुदयाल श्रीवास्तव,आदि ने शुक्ल जी के व्यतित्व एवं कृतित्व पर प्रकाश डाला।
इस अवसर पर रामस्वरूप दीक्षित, आर.एस.शर्मा, रामगोपाल रैकवार ,परमेश्वरीदास तिवारी,कौशल किशोर भटट, शीलचन्द्र जैन, पूरचन्द्र गुप्ता, गुलाब सिंह यादव, एच.पी.सिंह आदि उपस्थित रहे पढी।
गोष्ठी संचालन राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी’ ने किया
एवं सभी का आभार प्रदर्शन अजीत श्रीवास्तव ने किया।


rajeev namdeo rana lidhori

रपट- राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी’,
अध्यक्ष म.प्र.लेखक संघ,टीकमगढ़,
मोबाइल-9893520965,

रविवार, 9 अक्तूबर 2016

‘ताल दरवाजा में हुआ ‘कवि सम्मेलन’Tiakmgarh (mp)- Date-9-10-2016

‘ताल दरवाजा में हुआ ‘कवि सम्मेलन
Tiakmgarh (mp)- Date-9-10-2016

टीकमगढ़//‘ तालदरवाजा अखाडा समिति के तत्तवाधान में साहित्यिक सस्था ‘म.प्र लेखक संघ’ के संयोजन में तालदवाजा में ‘कवि सम्मेलन’ आायोजित किया जिसमें कवियों ने श्रोताओं का खूब हँसाया।
कवि सम्मेलन में मुख्य अतिथि बुन्देली के ख्यातिप्राप्त कवि डॉ. दुर्गेश दीक्षित रहे एवं अध्यक्षता साहित्यकार आर.एस.शर्मा ने की एवं विशिष्ट अतिथि के रूप में व्यंग्यकार रामगोपाल रैकवार जी रहे।
कवि सम्मेलन का संचालन राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी ने किया
तथा आभार प्रदर्शन वीरेन्द्र चंयोरिया ने किया।
कवि सम्मेलन की शुरूआत दीनदयाल तिवारी ने सरस्वती बंदना के बाद ये रचना पढ़कर की-
फौजी जूझ रहे आरि से, नेता हँसी उड़ाते हैं,
सेना लड़ रही सरहद पर, नेता टाँग अड़ा रहे।।
योगेन्द्र तिवारी ‘योगी’ ने पेरोडी सुनायी-
ये वतन ये वतन हमको तेरी कसम,
जो मिलेगा उसे खा जयेंगें हम।।
कुण्डेश्वर से प्रसिद्ध बुन्देली कवि डॉ. दुर्गेश दीक्षित ने रचना पढ़ी-
कजन कछु न मिले तुमें तो नेता जी बन जइयौ।।
फिर का काने मजे से घी की चुपरी खईयो।।
लखोरा से पधारे बुन्देली कवि गुलाब सिंह भाऊ ने पढ़ा-
वाहन जो दुनिया में छा गव,महाकाल मौ वारव।।



kavi sammelan
म.प्र.लेखक संघ के जिलाध्यक्ष
राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी’ ने हास्य कविता पढी-
पत्नी बोली देवी जी देखने जाना है
मैंने कहा देखने की क्या जरूरत है ।
तुम तो खुद काली माता हो
अपनी फरमाइसो की लंबी जीभ
तुम रोज निकालती हो।।
गण्ेश पन्नालाल शुक्ला ने पढ़ा-
चनी से टमाटर की चअनी बनवा,
जो है बुन्देली पाव, जो है बुन्देली पाव।
रामगोपाल रैकवार ने गीत सुनIया-
गिरजा गुरूद्वारा और मस्जिद मंदिर सबकी रीत है।
यहाँ ग़ज़ल नमाज है और प्रार्थना गीत है।।
वीरेन्द्र चंसोरिया ने गीत पढ़ी-
जिसने दिया ये अनुमप यक मानव तन,
उसी को समर्पित कर दो अपना ये जीवन।।
अनवर ‘साहिल’ ने ग़ज़ल सुनायी-
बेटी का फर्ज़ हमको निभाने नहीं दिया,
माँ-बाप ने दुनियाँ में आने नहीं दिया।।
आर.एस.शर्मा ने पढ़ा-
लड़ने लडाने की खातिर फिज़ा में जहर मत घोलो।
भारत माता की जय बोलो।
पूरन चन्द्र गुप्ता ने कविता ‘देवी जी की चाबी’ रचना पढ़ी।
अंत में तालदरवाजा अखाड़ा समिति के अध्यक्ष दीपक गिरि गोस्वामी,
व दीपक कुशवाहा, जयदीप प्रजापति, आकाश कुशवाहा, जैकी कुशवाहा, दीपू कुशवाहा, कमलेश,सौरभ कुशवाहा द्वारा सभी कवियों का स्iम्मान किया गया।

रपट- राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी’,
अध्यक्ष म.प्र.लेखक संघ,टीकमगढ़,
मोबाइल-9893520965,

सोमवार, 3 अक्तूबर 2016

‘गांधी जयंती पर हुई म.प्र.लेखक संघ की 215वीं कवि गोष्ठी) 2-10-2016





‘गांधी जयंती पर हुई म.प्र.लेखक संघ की 215वीं कवि गोष्ठी)
टीकमगढ़//‘ गायत्री शक्तिपीठ बानपुर दरवाजा मेंं साहित्यिक संस्था म.प्र. लेखक संघ की 215 वीं कवि गोष्ठी विष्व अहिंसा दिवस व ‘गांधी जंयती गीत’ पर केन्द्रित आयोजित की गयी
जिसके मुख्य अतिथि अभिनंदन गोइल रहे व
अध्यक्षता बल्देवगढ़ से पधारे वरिष्ठ साहित्यकार कोमल चन्द्र बजाज ने की,जबकि विशिष्ट अतिथि के रूप में बी.एल जैन साहब रहे।
सर्वप्रथम म.प्र.लेखक संघ के जिलाध्यक्ष राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी’ ने हाइकु विधा में सरस्वती बंदना पढी-
हे माँ शारदे, बुद्धि विवेक तू दे,ज्ञान से भर दे।
हे माँ शारदे, गल्तियों को मेरी तू, क्षमा कर दे।।
युवा कवि रवीन्द्र यादव ने कविता पढ़ी-
भूल जाओगे अपनी ही दुनिया में जाना। रवि कभी गोष्ठी में आकर तो देखो।।
परमेश्वरीदास तिवारी ने पढ़ा-सत्य अहिंसा नारा जिनका,रहा उम्र भर प्यारा,
दे कुर्बानी ली आजादी याद करे जग सारा।।
गण्ेश पन्नालाल शुक्ला ने पढ़ा-
गजब कर दिया मोदी जी गजब कर दिया।
घर में घुसकर दुश्मन को भुसा कर दिया है।।
बल्देवगढ़ से पधारे कवि कोमल चन्द्र बजाज ने सुनाया-
होते हे अवतरित धरा पर। महावीर,राम कृष्ण,गौतम गांधी।
रामगोपाल रैकवार ने गीत सुनया-
अहिंसा परम धर्म है और कर्मयोग भी,
दुष्टो के लिए करेंगे किन्तु बल प्रयोग भी।।
शत्रु दृष्टि डाली तो नेत्र फोड़ देंगे हम।
जहरीले नागों के दंत तोड़ देंगे हम।।
वीरेन्द्र चंसोरिया ने गीत पढ़ी-
जय जवान, जय किसान जय हिन्दुस्तान,
थल,वायु, नौसेना भारत की शान।।
दीनदयाल तिवारी ने रचना पढ़ी-
जब तक रोया नहीं बालक पिलाती दूध नहीं माता।
योगेन्द्र तिवारी ‘योगी’ ने पेरोडी सुनाया-
जब नेता अपने चमचो संग डाले जहाँ पे डेरा,वो भारत देश है मेरा।
डी.पी. शुक्ला ने कविता सुनायी-
सत्य अहिंसा से आजादी खुशहाल किया चमन है।
पूरन चन्द्र गुप्ता ने पढ़ा-
सुनना चाहे मुझसे आये सीखे वो हिन्दी,
हिन्दी भाषा ही भारत में बने राष्ट्रभाषा हिन्दी।।
अभिनंदन गोइल ने पढ़ा-
निश दिन के पापाचारों से धरती कराहती है,
अवतरण करो फिर से बापू माता पुकारती है।।
आर.एस.शर्मा ने पढ़ा-
प्रभु मुझे असत्य से सत्य की ओर ले जा,
तमस से ज्योति की ओर लेजा।
बी.एल जैन ने पढ़ा-बापू के गले की हम माला बनेंगे।
उनके गले से हम लिपटे रहेगें।।
अजीत श्रीवास्तव ने कहा कि-
महान आदमी तो एक ही हुआ जिसे महात्मा गांधी कहते है।
वी.के. मेहरा ने कहा-महात्मा गांधी शांति के पुरोधा थे,
उन्होंने सत्य और अहिंसा के रास्ते देश को आजादी दिलायी थी।
गोष्ठी संचालन वीरेन्द्र चंसौरिया ने किया तथा
सभी का आभार संस्था के सचिव रामगोपाल रैकवार ने किया।

रपट- राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी’,
अध्यक्ष म.प्र.लेखक संघ,टीकमगढ़,
मोबाइल-9893520965,

शनिवार, 1 अक्तूबर 2016

ब्लाग पाठकों की सूची 30-9-2016

मित्रों मेरी ब्लाग पाठकों की सूची में एक देश और जुड गया। वो है नार्वे।
 नार्वे 47 वाँ देश हो गया है कल ही ​नार्वे के एक पाठक ने मेरे ब्लाग हो पढ़ा है।
 बहुत बहुत धन्यवाद नार्वे के उन सम्मानीय पाठक हो जिन्होंने मेरा हिन्दी में लिखा ब्लाग पढ़ा है।
आप सभी पाठकों को भी मेरा हृदय से धन्यवाद।
rajeev namdeo rana lidhori

सोमवार, 5 सितंबर 2016

पन्नालाल जी नामदेव की स्मृति में हुआ ‘कवि सम्मेलन’ date-4-9-2016














rajeev namdeo
पन्नालाल जी नामदेव की स्मृति में हुआ ‘कवि सम्मेलन’

(‘डा. अनीता गोस्वामी व गुलाब मडबैया हुए सम्मानित)

(शाहगढ़, चंदेरा, दिगौड़ा, लखौरा, कुण्डेश्वर, तखा,पठा से आये कवि)

टीकमगढ़//‘ भगवान महावीर स्कूल में स्व.पन्नालाल जी नामदेव तृतीय स्मृति साहित्य सम्मान समारोह एवं कवि सम्म्ेलन आयोजित किया गया। जिसके मुख्य अतिथि साहित्यकार पं.गुणसागर सत्यार्थी रहे व अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार पं. हरिविष्णु अवस्थी जी रहे जबकि विशिष्ट अतिथि के रूप में हाजी ज़फ़रउल्ला खां ‘ज़फ़र’ एवं डॉ.दुर्गेश दीक्षित जी रहे। सर्वप्रथम सीताराम राय, आकांक्षा नामदेव एवं अनुश्रुति नामदेव ने सरस्वती बंदना गाकर कार्यक्रम का शुभारंभं किया।
तत्पश्चात नागदा के गोपाल कौशल जी को उनकी काव्य कृति सृष्टि का आधार है बेटी के लिए 1100रू. का स्व. पन्नालाल जी नामदेव तृतीय स्मृति साहित्य सम्मान’ प्रदान किया गया, किन्तु वे उनके परिवार में अचानक एक दुःखद घटना के कारण उपस्थित न हो सके, उनका सम्मान व समान राशि डाक द्वाराउन तक पहुँचा दी जायेगी।
डॉ. अनीता गोस्वामी को उनके काव्य लेखन के क्षेत्र के उल्लेखनीय योगदान के लिए स्व. रूपाबाई नामदेव स्मृति साहित्य सम्मान-2016 से सम्मानित किया गया तथा समाज सेवा के क्षेत्र के उल्लेखनीय योगदान के लिए श्री गुलाब चन्द्र मडबैया जी को ‘समाज रत्न सम्मान-2016’ से सम्मानित किया गया।
दूसरे दौर में कवि सम्मेलन हुआ, जिसमें पठा से पधारे कवि सीमाराम राय ने पढ़ा-शारदे कंठ विराजो आज, शब्द सार्थक कर दो है मा’ँ।
कुण्डेश्वर से पधारे डॉ. दुर्गेश दीक्षित जी ने रचना पढ़ी-
पन्ना, रूपाबाई की याद रखेगे लोग,
अवसर पर दुर्गेश को मिला सुखद संयोग।
पूज्य दादाजी की याद को ताजा कर हर वर्ष,
मिलता है राजीव को सुख, साधन, उत्कर्ष।।
शाहगढ़ से पधारे कवि राजा बाबू ने पढ़ा-
गुरू है वह सच्चा सूरज, जिसमें होते सकल जहान,
शिक्षक होता है महान
चन्देरा से पधारे कवि देवकी नंदनन शुक्ला ने बुन्देली कविता पढ़ी-
भैइयन कौन जमानौ आ गऔ,
बुन्देली भोजन व्यंजन जाने कितै बिलागऔ।
दिगौड़ा से आये युवा कवि देवेन्द्र अहिरवार कविता पढ़ी-
पहले घर के दरवाजे पर एक कुत्ता रखवाली करता था
पर आज आदमी करता हैं और कुत्ता आराम से अंदर सोता है।
लखौरा से आये बुन्देली कवि गुलाब सिंह भाऊ पढ़ा-
राजभाषा हिन्दी सबकी वानी है,मैला न करो जा गंगा कैसौ पानी है।
तखा से आये कवि रामगोपाल रैकवार ‘कँवल’-
साध नहीं है दीपमाल बन महलों में प्रकाश बिखेरूँ।
कुण्डेश्वर से आये कवि रवीन्द्र यादव ने कविता पढ़ी-
अंत नहीं पर्यन्त चले हे हिन्दी श्रेष्ठ महान है तू।।
परमेश्वरीदास तिवारी ने पढ़ा-
जिंदगी एक दिन दुल्हन बनाकर तो देखिए,
ईद हो जाएगी आईना उठाकर तो देखिए।
डॉ अनीता गोस्वामी ने पढ़ा-
आज मुक्त कंठ से गूँज है जय हिन्द की।
अनेकता में एकता विशेषता है हिन्द की।।
कवयित्री सीमा श्रीवास्तव ने पढ़ा-
दीप बनके मैं जलता रहा हूँ, तिमिर जग का मैं हरता रहा हूँ।।
दीनदयाल तिवारी ने रचना पढ़ी-
अपनी अपनी गल्ती मानों नसें न अपनी तानों,
सार कछू नैयां बातन में उसई करत धिगानों
सियाराम अहिरवार ने कविता पढ़ी-
नारी कैसे रहे सुरक्षित हषत उउसे सताती है।
पूरन चन्द्र गुप्ता ने पढ़ा-
हिन्दी बिन्दी से निकला,जनज न में ये गान है।
भारत तो हे देश हमारा हिन्दी हिन्दुस्तान है।
इनके आलावा गुणसागर सत्यार्थी, प.हरिविष्णु अवस्थी,भारत विजय बगेरिया, आर.एस.शर्मा,बी.एल जैन, वीरेन्द्र चंसौरिया, अभिनंदन गोइल, अमिताभ गोव्स्वामी, जी.पी.शुक्ला,जाबिर गुल,उमाशंकर मिश्र,केप्टन शेख सत्तार आजाद ने भी अपनी रचनाएँ सुनायी।
गोष्ठी संचालन वीरेन्द्र चंसौरिया ने किया तथा सभी का आभार प्रदर्शन कवि सम्मेलन के संयोजक एवं अध्यक्ष राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी’ ने किया।
रपट- राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी’,
अध्यक्ष म.प्र.लेखक संघ,टीकमगढ़,
मोबाइल-9893520965,