रविवार, 7 फ़रवरी 2016

Marathi me anudit

Rajeev
राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी’ की लघुकथा का ‘मराठी’ भाषा में अनुवाद

टीकमगढ़ (म.प्र.)/नगर के ख्यातिप्राप्त साहित्यकार व ‘म.प्र.लेखक संघ’ के जिलाध्यक्ष राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी’ की लघुकथा ‘बिजनेस’ मराठी भाषा में अनुदित होकर प्रकाशित हुई है। इससे पूर्व राना लिघौरी की अनेक रचनाएँ हिन्दी, बुंदेली, उर्दू और पंजाबी भाषा में अनुवादित होकर विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुकी है और अब बेलगाँव महाराष्ट्र से प्रकाशित ‘दैनिक तरूण भारत’ मराठी भाषा के प्रमुख दैनिक समाचार पत्र में दिनांक 26 जनवरी सन्-2016 को राना लिधौरी की लघुकथा ‘बिजनिस’ मराठी भाषा में ‘बिझनेस’ शीर्षक से रंगीन प्रकाशित हुई है जिसका अनुवाद सांगली महाराष्ट्र की प्रख्यात मराठी लेखिका उज्जवला केलकर ने किया है। इसके पूर्व भी राना लिधौरी की लघुकथाएँ ‘बालमन और पाप’, ‘दूसरा विवाह’, ‘अंग्रेजी और रद्दी’ आदि मराठी में अनुदित होकर प्रकाशित हो चुकी है।
गौरतलब हो कि राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी’ की ‘अर्चना’,‘रजनीगंधा’,‘नौनी लगे बुन्देली’ और राना का नज़राना’ चार पुस्तकें छप चुकी है एवं अनेक पत्र पत्रिकाओं का संपादन कर चुके है,वर्तमान में आप टीकमगढ़ जिले की एकमात्र साहित्यिक पत्रिका ‘आंकाक्षा’ का सफल संपादन विगत दस साल से करते आ रहे है। राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी की इस उपलब्धि पर नगर के साहित्यकारों, समाज बन्धुओं व मित्रों ने उन्हें बधाईयाँ एवं शुभकामनाएँ दी।

रपट- राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी
संपादक-‘आकांक्षा’ पत्रिका
अध्यक्ष-म.प्र. लेखक संघ टीकमगढ़


 

म.प्र.लेखक संघ कीे 207वीं गोष्ठी ‘ग़ज़ल’ पर केन्द्रित हुई Date-7-2-2016

म.प्र.लेखक संघ कीे 207वीं गोष्ठी ‘ग़ज़ल’ पर केन्द्रित हुई  Date-7-2-2016


rajeev namdeo rana lidhori

टीकमगढ़//‘ गायत्री शक्तिपीठ में म.प्र. लेखक संघ की 207 वीं गोष्ठी देश प्रेम,वीररस व नव वर्ष के शुभ आगमन ’ पर केन्द्रित आयोजित की गयी जिसके मुख्य अतिथि शायर अनवर खान ‘साहिल’ रहे व अध्यक्षता वरिष्ठ शायर हाजी ज़फ़रउल्ला खां ‘ज़फ़र’ ने की जबकि विशिष्ट अतिथि के रूप में बल्देवगढ़ से पधारे वरिष्ठ साहित्यकार कोमलचन्द्र जी बजाज रहे।
सर्वप्रथम जयहिन्द सिंह स्वतंत्र’ ने ग़ज़ल पढ़ी-
दुनिया में मिरे मुल्क से जो आगे चल सके।
अब तक जहाँ में पैदा वो परचम नहीं हुआ।।
म.प्र.लेखक संघ के जिलाध्यक्ष राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी’ ने ग़ज़ल सुनायी-
जिस घर में बुुजुर्गो का सम्मान नहीं होता,
उस घर कभी ईश्वर भी मेहरवान नहीं होता।।
क्यों ढँूढ़ते फिरते हो तुम इस जहाँ में‘राना’,
ईश्वर का कहीं कोई मकान नहीं होता।।
हाजी ज़फ़रउल्ला खां ‘ज़फ़र’ ने ग़ज़ल पढ़ी-
कान मशीने मँुह बत्तीसी आँख पे चश्मा डाले है।
उम्र रसीदा मे देखो तो खुद को खूब संभाले है।।
अनवर खान ‘साहिल’ ने ग़ज़ल पढ़ी-
छुपाकर फूल रख भी लूं तो खुश्बू आ ही जाती है।
में हिन्दी में ग़ज़ल लिखता हूँ उर्दू आ ही जाती है।।
पूरन चन्द्र गुप्ता ने पढ़ा-करो बिकास तुम अपने शहर व गाँवों का,इन्हीं चुनाव में हमने तुम्हें जिताया था।।
ग्राम बल्देवगढ़ से पधारे कवि कोमलचन्द्र बजाज ने पढ़ा-
मंदिर में पूजा करें,लगाते भगवान को भोग,
दुकान पर जाकर,गरीबों को लूटते है लोग।।
गनेश पन्नालाल शुक्ला ने सुनाया -
काले धन काले धन वाले,मन काला और मुँह भी काले।।
परमेश्वरीदास तिवारी ने कविता पढ़ी-
कहाँ से आया किस लिए आया और कहाँ है जाना,
मकसद क्या है इस जीवन का,मानव बनकर आना।
ग्राम लखौरा से आये कवि गुलाब सिंह ‘भाऊ’ ने बुन्देली ग़ज़ल पढ़ी
कितै तुम सो गये हो भगवान,करके बैरे दोई कान।
सीताराम राय ने सुनाया -
कल का क्या भरोसा मेरे साथियों आज जी भर के जीने का वादा करो।
योगेन्द्र तिवारी ‘योगी’ ने पेरोडी सुनायी-
ये मेर वतन के लुच्चों अबकरो न ातुम मनमानी।
शांति कुमार जैन ने कविता पढ़ी-
मौसम में बहार आती हे बसंत आने के बाद,
जीवन में बहार आती है संत आने के बाद।
बी.एल जैन ने कविता पढ़ी-
जवानी में ढाये जिसने बडे बडे कहर,
बुढापे में अब उसे उंगली लाठी का सहारा चाहिए।
अवध बिहारी श्रीवास्वत ने दोहे पढे-
सब जग ईश्वर रूप है भलो बुरौ नहि कोय,
जैसी जिसकी भावना वैसो ही फल होय।
आर एस.शर्मा ने कविता सुनायी-
अपना भारत अतुल्य भारत मेक इंडिया के सपनो का भारत।
अभिनंदन गोइल ने क्षणिकाये पढी।
ब्रजेश कुशवाहा ने भी अपने विचार रखे।
गोष्ठी संचालन पूरन चन्द्र गुप्ता ने किया ने किया एवं
सभी का आभार प्रदर्शन संस्था अध्यक्ष राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी’ ने किया। म.प्र. लेखक संघ की आगामी 208वीं गोष्ठी दिनांक 6 मार्च 16 को लघुकथा एवं कहानी पर केन्द्रित रखी गयी है।।


रपट- राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी’,
अध्यक्ष म.प्र.लेखक संघ,टीकमगढ़,
मोबाइल-9893520965,