सोमवार, 5 सितंबर 2016

पन्नालाल जी नामदेव की स्मृति में हुआ ‘कवि सम्मेलन’ date-4-9-2016














rajeev namdeo
पन्नालाल जी नामदेव की स्मृति में हुआ ‘कवि सम्मेलन’

(‘डा. अनीता गोस्वामी व गुलाब मडबैया हुए सम्मानित)

(शाहगढ़, चंदेरा, दिगौड़ा, लखौरा, कुण्डेश्वर, तखा,पठा से आये कवि)

टीकमगढ़//‘ भगवान महावीर स्कूल में स्व.पन्नालाल जी नामदेव तृतीय स्मृति साहित्य सम्मान समारोह एवं कवि सम्म्ेलन आयोजित किया गया। जिसके मुख्य अतिथि साहित्यकार पं.गुणसागर सत्यार्थी रहे व अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार पं. हरिविष्णु अवस्थी जी रहे जबकि विशिष्ट अतिथि के रूप में हाजी ज़फ़रउल्ला खां ‘ज़फ़र’ एवं डॉ.दुर्गेश दीक्षित जी रहे। सर्वप्रथम सीताराम राय, आकांक्षा नामदेव एवं अनुश्रुति नामदेव ने सरस्वती बंदना गाकर कार्यक्रम का शुभारंभं किया।
तत्पश्चात नागदा के गोपाल कौशल जी को उनकी काव्य कृति सृष्टि का आधार है बेटी के लिए 1100रू. का स्व. पन्नालाल जी नामदेव तृतीय स्मृति साहित्य सम्मान’ प्रदान किया गया, किन्तु वे उनके परिवार में अचानक एक दुःखद घटना के कारण उपस्थित न हो सके, उनका सम्मान व समान राशि डाक द्वाराउन तक पहुँचा दी जायेगी।
डॉ. अनीता गोस्वामी को उनके काव्य लेखन के क्षेत्र के उल्लेखनीय योगदान के लिए स्व. रूपाबाई नामदेव स्मृति साहित्य सम्मान-2016 से सम्मानित किया गया तथा समाज सेवा के क्षेत्र के उल्लेखनीय योगदान के लिए श्री गुलाब चन्द्र मडबैया जी को ‘समाज रत्न सम्मान-2016’ से सम्मानित किया गया।
दूसरे दौर में कवि सम्मेलन हुआ, जिसमें पठा से पधारे कवि सीमाराम राय ने पढ़ा-शारदे कंठ विराजो आज, शब्द सार्थक कर दो है मा’ँ।
कुण्डेश्वर से पधारे डॉ. दुर्गेश दीक्षित जी ने रचना पढ़ी-
पन्ना, रूपाबाई की याद रखेगे लोग,
अवसर पर दुर्गेश को मिला सुखद संयोग।
पूज्य दादाजी की याद को ताजा कर हर वर्ष,
मिलता है राजीव को सुख, साधन, उत्कर्ष।।
शाहगढ़ से पधारे कवि राजा बाबू ने पढ़ा-
गुरू है वह सच्चा सूरज, जिसमें होते सकल जहान,
शिक्षक होता है महान
चन्देरा से पधारे कवि देवकी नंदनन शुक्ला ने बुन्देली कविता पढ़ी-
भैइयन कौन जमानौ आ गऔ,
बुन्देली भोजन व्यंजन जाने कितै बिलागऔ।
दिगौड़ा से आये युवा कवि देवेन्द्र अहिरवार कविता पढ़ी-
पहले घर के दरवाजे पर एक कुत्ता रखवाली करता था
पर आज आदमी करता हैं और कुत्ता आराम से अंदर सोता है।
लखौरा से आये बुन्देली कवि गुलाब सिंह भाऊ पढ़ा-
राजभाषा हिन्दी सबकी वानी है,मैला न करो जा गंगा कैसौ पानी है।
तखा से आये कवि रामगोपाल रैकवार ‘कँवल’-
साध नहीं है दीपमाल बन महलों में प्रकाश बिखेरूँ।
कुण्डेश्वर से आये कवि रवीन्द्र यादव ने कविता पढ़ी-
अंत नहीं पर्यन्त चले हे हिन्दी श्रेष्ठ महान है तू।।
परमेश्वरीदास तिवारी ने पढ़ा-
जिंदगी एक दिन दुल्हन बनाकर तो देखिए,
ईद हो जाएगी आईना उठाकर तो देखिए।
डॉ अनीता गोस्वामी ने पढ़ा-
आज मुक्त कंठ से गूँज है जय हिन्द की।
अनेकता में एकता विशेषता है हिन्द की।।
कवयित्री सीमा श्रीवास्तव ने पढ़ा-
दीप बनके मैं जलता रहा हूँ, तिमिर जग का मैं हरता रहा हूँ।।
दीनदयाल तिवारी ने रचना पढ़ी-
अपनी अपनी गल्ती मानों नसें न अपनी तानों,
सार कछू नैयां बातन में उसई करत धिगानों
सियाराम अहिरवार ने कविता पढ़ी-
नारी कैसे रहे सुरक्षित हषत उउसे सताती है।
पूरन चन्द्र गुप्ता ने पढ़ा-
हिन्दी बिन्दी से निकला,जनज न में ये गान है।
भारत तो हे देश हमारा हिन्दी हिन्दुस्तान है।
इनके आलावा गुणसागर सत्यार्थी, प.हरिविष्णु अवस्थी,भारत विजय बगेरिया, आर.एस.शर्मा,बी.एल जैन, वीरेन्द्र चंसौरिया, अभिनंदन गोइल, अमिताभ गोव्स्वामी, जी.पी.शुक्ला,जाबिर गुल,उमाशंकर मिश्र,केप्टन शेख सत्तार आजाद ने भी अपनी रचनाएँ सुनायी।
गोष्ठी संचालन वीरेन्द्र चंसौरिया ने किया तथा सभी का आभार प्रदर्शन कवि सम्मेलन के संयोजक एवं अध्यक्ष राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी’ ने किया।
रपट- राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी’,
अध्यक्ष म.प्र.लेखक संघ,टीकमगढ़,
मोबाइल-9893520965,