रविवार, 25 दिसंबर 2016

‘राना लिधौरी’ हुए ‘मंजर एवार्ड’ से सम्मानित

date 25-12-2016
‘तज़ीम बज्में अदब’ को मुशायरा सम्पन्न-
‘राना लिधौरी’ हुए ‘मंजर एवार्ड’ से सम्मानित
 
टीकमगढ़// इंदिरा कालोनी में शेख आजाद केप्टन के निवास पर तंजीम बज्में अदब का सालाना जलसा एवं मुशायरा हुआ जिसकी सदारत झांसी से तशरीफ लाये शायर जबनाब सिराज तनवीर ने की तथा मेह




rajeev namdeo rana lidhoriमाने खूसूसी शायर कारी अखलाक साहब ने की एवं मुशायरे की नजामत झाँसी के शायर सराफराज ‘मासूम’ ने की, विशिष्ट अतिथि के रूप में मातादीन वंसल, मुमताज अली व रमाजान खां कल्लू उपस्थित रहे।
 इस मौके पर राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी’,अनवार खान सहिल, एवं बशीर फराज को ‘मंजर एवार्ड से सम्मनित किया गया। इस मौके पर फरीद बेग (बिजावर) नीरव (बिजावर),नसीम मुंहफट झाँसी, इकवाल फजा, हाजी जफरउल्ला खां ‘जफर’, राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी’, अनवर खान, साहिल, बशीर फराज, जाबिर गुल, चाँद मोहम्मद आखिर, साबिरा सिद्दकी, शेख सत्तार आजाद केप्टन, गुलाब िंसह भाऊ, पूरनचन्द्र गुप्ता,सियाराम अरिवार,आदि ने अपने कलाम पढे़ सभी का शुक्रिया अदा सदर इंकवाल फजा ने किया।


रपट- राजीव नामदेव ‘‘राना लिधौरी’’
                                    जिलाध्यक्ष टीकमगढ़
,   

बुधवार, 21 दिसंबर 2016

‘ थिंक बिथ मी’ पुस्तक का विमोचन हुआ DATE- 18-12-2016








sahara
‘ थिंक बिथ मी’ पुस्तक का विमोचन हुआ

टीकमगढ़// ‘‘हमे अपने कार्य क्षेत्र में सदैव सक्रिय रहना चाहिए’’ यह उद्गार ‘‘म.प्र.लेखक संघ’ के जिलाध्यक्ष एवं प्रसिद्ध साहित्यकार राजीव नामदेव ‘‘राना लिधौरी’’ ने कार्यक्रम में श्री मुख्य अतिथि के रूप में व्यक्त किये।
सहारा आफिस में हुए विमोचन समारोह में मुख्य अतिथि राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी रहे जबकि कार्यक्रम की अध्यक्षता सेक्टर प्रमुख परवेज खान ने की।
इस अवसर पर सहारा श्री सुव्रतो राय की पुस्तक ‘‘थिंक बिथ मी’ का विमोचन किया गया। श्री राना लिधौरी ने कहा कि सहारा श्री कि यह पुस्तक बहुत उपयोगी,व पठनीय है जो अपकी सोच को बदल कर रख देगी।
सेक्टर प्रमुख परवेज खान साहब ने कहा की सभी को यह पुस्तक पढ़नी चाहिए इससे बहुत कुछ सीखने को मिलेगा। गौरतलब हो कि सहारा श्री की ‘थिंक विथ मी’ पुस्तक हिन्दी व अंग्रेजी दोनों भाषाओं में प्रकाशित की गयी है। इसके पूर्व उनकी बहुचर्चित पुस्तक ‘‘मत्रांस’ सर्वाधिक बिक्री कर ‘वेस्ट सेलर आवार्ड’ से सम्मानित हो चुकी है।
इस अवसर पर अनिल िंसह, अरूण भामड़ी, प्रदीप जैन,संतोष अग्रवाल, जलील खान, लक्ष्मण हरदासानी, घनश्याम हरदासानी, मुनीर खान, अनुराग त्रिपाठी, जय प्रकाश सक्सेना, अरूण खरे, मनीष चौरसिया,हरीष तिवारी,अजय यादव, इरफान खान आदि उपस्थति रहे।
कार्यक्रम का संचालन प्रदीप खरे ने किया एवं सभी का आभार प्रदर्शन अनिल सिंह ने किया।

रपट- राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी
जिलाध्यक्ष म.प्र. लेखक संघ,
टीकमगढ़
मोबाइल-9893520965

,


रविवार, 4 दिसंबर 2016

‘बुन्देली’ पर हुई कवि गोष्ठी date-4-12-2016












bundeli
‘बुन्देली’ पर हुई कवि गोष्ठी   date-4-12-2016
टीकमगढ़/यूनीक एयूकेशलन अकेडमी स्कूल चकरा,सिद्धखान रोड, में म.प्र.लेखक संघ’ जिला इकाई टीकमगढ़ की 218 वीं गोष्ठी ‘बन्देली’ पर हुई जिसके मुख्य अतिथि आचार्य पं.दुर्गाचरण शुक्ल रहे व
अध्यक्षता प.हरिविष्णु अवस्थी ने की
जबकि विशिष्ट अतिथि के रूप में कुण्डेश्वर से पधारे
प.गुणसागर सत्यार्थी एवं डॉ. दुर्गेश दीक्षित रहे।
श्री गणेश एवं सरस्वती वंदना के पश्चात
ग्राम नदनवारा से पधारे कवि शोभराम दांगी ने कविता पढ़ी-
बडे हरे भरे पेडन सें देखों कैसों दोरो, जम रव।
जीके दोरे पेड़ो नइयाँ उकौं कैसों लगरव।।
बल्देवगढ़ से पधारे कवि कोमलचन्द्र बजाज ने पढ़ा-
मान त्याग दे तू जीवन में मिल जाये,अविनाशी है।
ग्राम लखौरा से पधारे कवि गुलाब सिंह यादव ‘भाऊ’ ने पढ़ा-
‘अब नये लरका बिगरत जा रय,अपने मन कौ चा रये।
ग्राम पठा से आये कवि सीताराम राय ने पढा-
‘‘होत भुन्सरा गुफना लेके चल दईदारे रे।
हँसमुख गोलमटोल है मुईया उगर की वारी रे।
सीमा श्रीवास्तव ने पढ़ा-
हमने कइ धन्ना सेठ सो बाबूलाल चौक गये।
काय के आदे बार दय,आदे जमडार में डार दय।
गणेश पन्ना लाल शुक्ला ने अपनी प्रसिद्ध बुन्देली कविता
‘‘जे है बुन्देली पाव’’ सुनायी।
म.प्र. लेखक संघ के अध्यक्ष राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी’ ने
बुन्देली कुण्डलियाँ सुनाई-
दारू में गुन भौत है दारू करती ढैर,
दारू से कई इक मिटे पार लगे न फेर।।
कह ‘राना’कविराय दारू है चाल बिकारू।
जो अपनों हित चहे
कभऊँ न पीवे दारू।।
सियराम अहिरवार ने रचना पढ़ी-
जनवा हैं पर जानत नईया,बात काउ की मानत नईया।
बिन सींगन के नटवा हो गये, अपने वे पहचानत नईयाँ।।
हाजी ज्फरउल्ला खां ‘जफ़र’ ने ग़ज़ल पढ़ी-
सुन कें हँस रय काय जफर तुम अपनी बीती सबे सुनाई।।
कृष्णकिशोर रावत ने कविता सुनायी-
परिंदो ने बना लिये नये घर,जंगलों से आ गये है शहर।।
डी.पी.शुक्ला ने कविता सुनायी-
ई देश के लाने सवई जौ कर दओ,
पास पडौस एक कोने में धर दओ।
पूरन चन्द्र गुप्ता ने कविता पढ़ी-
परनकुटी पै पैरों देरय,लक्ष्मण भइया बलधारी।
देखत है सब नरनारी।।
आर.एस.शर्मा ने कविता पढ़ी-
नोट भी बदल रहा, सोच भी बदल रही मेरा देश भी बदल रहा।
बी.एल.जैन ने कविता पढ़ी-
भाई मैंने देखा एक खोटा सिक्का आंतकवाद पर अधारित।

इनके अलावा डॉ.डी.पी.,खरे, वीरेन्द्र चंसौरिया, रामगोपाल रैकवार ,विजय मेहरा, आर.एस.शर्मा, परमेश्वरीदास तिवारी,मुन्ना मिश्रा,डी.पी.यादव, दयालीराम विश्वकर्मा, संजय त्रिपाठी,एस.अहलावत,आदि ने भी अपने विचार रखे।
गोष्ठी संचालन राजीव नामदेव राना लिधौरी’ ने किया
एवं सभी का आभार प्रदर्शन डॉ.महेन्द्र विश्वकर्मा ने किया।

रपट- राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी’,
अध्यक्ष म.प्र.लेखक संघ,टीकमगढ़,
मोबाइल-9893520965,